छत्तीसगढ़

कोयला मंत्रालय के अपर सचिव ने किया गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क का दौरा फॉसिल्स पार्क के संरक्षण और विकास को मिला समर्थन

एमसीबी/24 जनवरी 2026/ जिले के हसदेव क्षेत्र में स्थित गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क को उस समय विशेष महत्व मिला जब कोयला मंत्रालय भारत सरकार के अपर सचिव हिटलर सिंह हसदेव एरिया की कोल माइंस के निरीक्षण प्रवास के दौरान फॉसिल्स पार्क पहुंचे। पार्क आगमन पर पुरातत्व एवं पर्यटन विभाग के जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडे ने उनका स्वागत किया।

दौरे के दौरान अपर सचिव ने गहरी जिज्ञासा और व्यक्तिगत रुचि के साथ गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क के ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और पर्यटन महत्व की जानकारी ली। डॉ. पांडे ने तथ्यात्मक रूप से बताया कि यह पार्क लगभग 29 करोड़ वर्ष पुराने गोंडवाना कालीन समुद्री जीवाश्मों का अनूठा साक्ष्य है, जो न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश की भू-वैज्ञानिक विरासत को दर्शाता है। उन्होंने फॉसिल्स पार्क के अंतर्गत विकसित कैक्टस गार्डन और इंटरप्रिटेशन बिल्डिंग का भी भ्रमण कराया, जहां जीवाश्मों से जुड़ी जानकारी को आमजन और शोधार्थियों के लिए सरल एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है।

डॉ. पांडे द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि वर्ष 2015 में पार्क के समग्र विकास हेतु वन विभाग द्वारा लगभग 8 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इसके साथ ही जिला प्रशासन द्वारा पुरातत्व संग्रहालय के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया की जानकारी देते हुए फॉसिल्स पार्क परिसर या समीप एक समर्पित पुरातत्व संग्रहालय के निर्माण की आवश्यकता और महत्व पर जोर दिया गया। उन्होंने बताया कि संग्रहालय के निर्माण से क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करने के साथ-साथ पर्यटन को भी नई दिशा मिलेगी।

इस पर अपर सचिव ने विरासत संरक्षण से जुड़े प्रयासों की सराहना करते हुए यथासंभव सहयोग का आश्वासन दिया तथा कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के माध्यम से प्रस्ताव तैयार कर भेजने की बात कही, ताकि आगे की प्रक्रिया को गति दी जा सके।

इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के मानस पाल और चेतन गौड, एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के अनिल कुमार मुख्य महाप्रबंधक (खनन), हसदेव एरिया की मुख्य महाप्रबंधक मनोज बिश्नोई, सेंट्रल हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार, डॉ. लवकेश गुप्ता सहित कोल माइंस के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। यह दौरा गोंडवाना मरीन फॉसिल्स पार्क को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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