छत्तीसगढ़

राज्यभर में सामूहिक दवा सेवन ( MDA ) अभियान, 1.58 करोड़ लाभार्थियों को मिलेगा लाभ हाथीपाँव उन्मूलन की दिशा में बड़ा कदम, 18 जिलों में चलेगा व्यापक अभियान

एमसीबी/10 फरवरी 2026/ राज्य में हाथीपाँव (फाइलेरियासिस) रोग के उन्मूलन के उद्देश्य से राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत फरवरी 2026 में सामूहिक दवा सेवन ( MDA ) अभियान का व्यापक स्तर पर संचालन किया जा रहा है। यह अभियान राज्य के 18 जिलों के 65 विकास खंडों में संचालित होगा, जिसके अंतर्गत लगभग 1.58 करोड़ लाभार्थियों को दवा सेवन कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

अभियान के तहत 15 जिलों के 58 विकास खंडों में IDA ( Ivermectin + DEC + Albendazole ) तथा 3 जिलों के 7 विकास खंडों में DA ( DEC + Albendazole ) दवाओं का वितरण किया जाएगा। यह कार्यक्रम 10 से 25 फरवरी 2026 तक चरणबद्ध रूप से संचालित किया जाएगा। 10 से 12 फरवरी तक आंगनबाड़ी, स्कूल, कॉलेज एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में बूथ लगाकर दवा सेवन कराया जाएगा। 13 से 22 फरवरी तक ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर द्वारा घर-घर भ्रमण कर समुदाय स्तर पर दवा सेवन सुनिश्चित किया जाएगा।

23 से 25 फरवरी तक छूटे हुए लाभार्थियों के लिए मॉप-अप राउंड आयोजित किया जाएगा। साथ ही 10 से 25 फरवरी तक सभी स्वास्थ्य संस्थानों में विशेष MDA कॉर्नर संचालित किए जाएंगे। कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए राज्य में 54,612 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर, 5,461 सुपरवाइज़र एवं 2,279 प्रशिक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ( CHO ) की तैनाती की गई है।

किसी भी आपात स्थिति से निपटने हेतु जिला एवं विकासखंड स्तर पर Rapid Response Team का गठन किया गया है। अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी कार्मिकों का प्रशिक्षण, राज्य स्तरीय समन्वय बैठक, ToT तथा मीडिया वर्कशॉप पहले ही पूर्ण की जा चुकी हैं। समुदाय सहभागिता को बढ़ावा देने हेतु बिहान CLF, सरपंचों, स्व-सहायता समूहों, विद्यार्थियों एवं अन्य हितधारकों को अभियान से जोड़ा गया है।

लाभार्थियों को SMS के माध्यम से पूर्व सूचना भी दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था, प्रशिक्षित मानव संसाधन, पर्याप्त दवा उपलब्धता एवं व्यापक जन सहभागिता के माध्यम से 100 प्रतिशत दवा सेवन कवरेज सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान राज्य को हाथीपाँव (फाइलेरियासिस) मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा।

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